एक


बड़ा विचित्र अंक है,
राजा हो या रंक कोई, सभी के एक संग है।

यह एकता की सीख दे, बाटता भी है यही।
जो एक-एक हो अलग तो एक तो वो है नहीं।

एक देश, एक धर्म, एक जाती, एक कर्म,
एक वंश, एक रंग, एक व्देश, एक जंग,
एक-एक है खड़ा अलग-थलग बटा हुआ।

चलो आज गिंती के इस अंक को भी जान लें
एकता की सीख से ही एक को पहचान लें।

एकता वही है कि जो हर एक को ही जोड़ दे।
वो साथ तो द्वेश है जो बंधु को ही तोड़ दे।

उस तोप से उठती चीखों को भी याद करो।
जंग के हित में नहीं सभी विचार करो।
वचन भरो की सदैव अमन का ही संदेश बनो।

सुर से बढ़कर संगीत बनो, कलेश-द्वेश का शोर नहीं।
साथ मिल बन एक चलो, सत्य मार्ग पर चलो सभी।